पहला पन्ना / खबरें / सृजनात्मक / विचार-मंथन / टांगराइन की प्राकृतिक खूबसूरती के बीच यादगार दिन

 
सत्येन्द्र कुमार
सत्येन्द्र कुमार

सत्येन्द्र कुमार

पोटका प्रखंड का यह पंचायत जंगल और पहाड़ के बीच हैं. बेहद खूबसूरत गांव. उतने ही खूबसूरत यहाँ के जंगल और पहाड़.७ जनवरी को यहाँ जाकर बहुत शुकुन मिला.कुछ तस्वीरें पोस्ट कर रहा हूँ और गांव के स्कूल की तस्वीर बदल देने वाले युवा हेड मास्टर अरविन्द तिवारी के बारे में आपको बताना चाहता हूँ.

हमें नाज़ है अरविन्द तिवारी पर
• हर सरकारी स्कूल में चाहिए अरविन्द तिवारी सरीखा हेड मास्टर
पहले कभी पत्रकार रहे अरविन्द तिवारी अब झारखण्ड में सरकारी टीचर हैं.जमशेदपुर से ४६ किलोमीटर दूर टांगराइन पंचायत में वो अभी हेड मास्टर हैं. एक साल से काम समय में अरविन्द ने इस विद्यालय की तस्वीर बदल दी हैं.

सत्येन्द्र कुमार टांगराइन ग्राम में कहानी मेला के दौरान।
सत्येन्द्र कुमार टांगराइन ग्राम में कहानी मेला के दौरान।

अरविन्द जब सरकारी मास्टर की नौकरी ज्वाइन किये तो वो मुझसे मिलने आये थे.मैंने कहा-भाई टीचिंग बहुत पवित्र पेशा है.इसकी लाज जरूर रखना.अब पत्रकारिता को गुड बाई बोलो और टीचिंग पर ध्यान दो. तुम्हारे जैसे होनहार और ईमानदार जहा भी रहेंगे वो संस्थान चमकेगा.

हमेशा मुस्कराते रहने वाले अरविन्द ने मेरी बात मान ली.
वो जहां भी रहे वह के स्टूडेंट और अभिभावको के बीच लोकप्रिय रहे. टांगराइन जैसे सुदूर ग्रामीण एरिया में ट्रांसफर होने पर मुखिया से मिले और बोले आप लोग सहयोग करेंगे तो यह स्कूल राज्य में अपनी पहचान बनाएगा, इसकी गारंटी देता हूँ.

अरविन्द जब टांगराइन उत्क्रमित मध्य विद्यालय ज्वाइन करने गए तो वहाँ के लोगो ने माला पहना कर स्वागत किया. सभी टीचरों को साथ ले अरविन्द ने स्कूल का कायाकल्प कर दिया है. सुनावो पहाड़ा अभियान, कहो कहानी अभियान से लेकर भूमिज और संथाली भाषा की पढाई, स्पोकन इंग्लिश की पढ़ाई के लिए वोलेंटियर अरविन्द ने तैयार किये. स्कूल के बच्चों ने बदलते माहौल में राज़ स्कूल आना शुरू किया.अगर कोई स्टूडेंट एब्सेंट होता तो उसके सहपाठी पहाड़ा पढ़ते हुए उसके घर तक जाते और उसे लेकर ही लौटते.

सत्येन्द्र कुमार टांगराइन ग्राम में
सत्येन्द्र कुमार टांगराइन ग्राम में

टांगराइन उत्क्रमित मध्य विद्यालय के स्टूडेंट ट्रैन पर नहीं चढ़े थे, यह जानकारी मिलने पर पूरे स्कूल के बच्चों को अरविन्द ने गाँव वालों के साथ टाटा बादाम पहर ट्रैन से यात्रा कराइ. अब शाट प्रतिशत स्टूडेंट क्लास करने आते हैं. स्कूल के बगल में तालाब है, सो अरविन्द ने तैराकी जानने वाले स्टूडेंट के लिए तैराकी प्रतियोगिता कराइ तो पूरा गांव उसे देखने आया. आज स्कूल में १०८ स्टूडेंट हैं जो नियमित पढ़ने आ रहे हैं.

७ जनवरी २०१८ को कहानी उत्सव के दूसरे दिन स्कूल के स्टूडेंट,स्कूल कमेटी और टीचर के लिए पिकनिक भी आयोजित हुआ. मैंने भी एक सत्र में बच्चों की क्लास ली. बेहद अनुशासित बच्चे यहाँ के हैं.

गांव के लोगों ने अरविन्द की मुक्त कंठ सा सराहना की तो मन बाग़-बाग़ हो उठा. शाबाश अरविन्द ! नाज़ है भाई तुम पर. हमें पूरा भरोसा है -टांगराइन उत्क्रमित मध्य विद्यालय में बदलाव की कहानी एक दिन पूरे झारखण्ड और देश में बेंचमार्क बनेगा.

 

(यह आलेख पत्रकार सत्येन्द्र कुमार के फेसबुक पोस्ट से साभार लिया गया है)

 
 
 
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