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तरुण कुमार

तरुण कुमार
तरुण कुमार

पुराने ज़माने में दादी माँ की कहानियां सुनकर बच्चों को जो अलौकिक अनुभव प्राप्त होता था, उसकी कल्पना आज के जमाने में की ही नहीं जा सकती। आज जब लोगों में पढ़ने की आदत छूटने लगी हैं, बच्चों पर पढाई का बोझ बढ़ने लगा है, उन्हें कोर्स की किताबें अरुचिकर मालूम पड़ने लगी है, तब बदलते समय में बच्चों को पढ़ाने के रोचक तरीक़े ईजाद करने हेतु नित नए प्रयोग किये जा रहे हैं।

इस दौर में कहानियाँ भी बच्चों में पठन-पाठन की आदत विकसित करने में महती भूमिका निभा सकती है।
कहानियां सीखने-सीखाने का सबसे सशक्त माध्यम है। कहानियों के माध्यम से हम क्या-क्या जान पाते है, महसूस कर पाते है, इसकी कोई सीमा ही नहीं, जिसे शायद ही हम कभी अपने जीवन में अनुभव कर पाये। कहानियां जानकारियां, पढ़ने में रूचि बढ़ाने के साथ-साथ आपकी कल्पनाशीलता को भी उड़ान देती है।

कहानी मेला के पहले दिन प्रख्यात साहित्यकारों ने बच्चों का कहानियाँ सुनायीं।
कहानी मेला के पहले दिन प्रख्यात साहित्यकारों ने बच्चों का कहानियाँ सुनायीं।

इसी तर्ज पर पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड स्थित उ0म0वि0 टांगराइन में बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने हेतु कहानी मेला का आयोजन किया गया। मेला में साहित्य जगत सहित कला, पत्रकारिता, समाजसेवा व अन्य क्षेत्रों के जाने-माने लोगों ने बच्चों को तरह-तरह की रोचक कहानियां सुनाई।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरविंद तिवारी के मजबूत इच्छाशक्ति व परिवर्तन की ललक की बदौलत तीन दिनों तक चला यह आयोजन निश्चय ही बच्चों में कहानियों के प्रति रूचि जगाने में सफल रहा है, जिसका सकारात्मक परिणाम आने वाले समय में देखने को मिल सकता है। कहानी मेला का हिस्सा बन मैं खुद काफी गौरवान्वित महसूस कर पा रहा हूँ।

दैनिक खबर मंत्र के ब्यूरो हेड एवं पत्रकार सत्येन्द्र कुमार तथा तरुण कुमार बच्चों के साथ खेल में मशगूल।

कहानी मेला के सफल आयोजन के बाद टांगराइन विद्यालय प्रबंधन समिति ने इसे अपने वार्षिक कैलेंडर में शामिल करने की योजना बनाई है, जो बेहद काबिलेतारीफ है, साथ ही अन्य सभी विद्यालयों के लिए भी अनुकरणीय है।

(यह आलेख तरुण कुमार के फेसबुक पोस्ट से साभार लिया गया है)

 
 
 
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