पहला पन्ना / खबरें / गतिविधियाँ / कथा-कहानी / टांगराइन में कहानी मेला के दूसरे दिन पत्रकारों, रंगकर्मियों ने रंग जमाया, ग्रामीणों के साथ वनभोज भी

 

• कहानी मेला के दूसरे दिन बच्चों ने सुनी पंचतंत्र, प्रसिद्ध कथाकारों एवम स्थानीय भाषा की कहानियां
• विद्यालय में रखी गयी औषधीय बगीचे की आधारशिला
• ग्रामीणों ने किया वनभोज का आयोजन कर किया कथा वाचकों का स्वागत

टांगराईन, पोटका (जमशेदपुर), जनवरी 7, 2018: उत्क्रमित मध्य विद्यालय, टांगराइन में आज कहानी मेला के दूसरे दिन पत्रकारों एवं रंगकर्मियों ने बच्चों के साथ मिलकर रंग जमाया और वनभोज का भी आनंद लिया।

कहानियां रुचिकर तरीके से पठन पाठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बच्चों में कहानियों के प्रति रूचि बढ़ाने हेतु जमशेदपुर से तक़रीबन 46 किलोमीटर दूर स्थित मध्य विद्यालय टांगराईन, पोटका में कहानी मेला का आयोजन किया जा रहा है।

कहानी मेला के दूसरे दिन बच्चे कहानियों की दुनिया में सैर करते हुए ढेरों ज्ञानवर्धक विषयों से रूबरू हुए।

बांग्ला साहित्यकार सुनील कुमार डे, शिक्षक दुलाल जंद दास, पत्रकार सत्येन्द्र कुमार, संजय प्रसाद, रंगकर्मी विजय भूषण, अरुणा भूषण, युवा साहित्यकार तरुण कुमार, केन्द्रीय विद्यालय के शिक्षक संतोष शर्मा, विधान कुमार, भूमिज भाषा के साहित्यकार विभीषण सरदार, जीतेन्द्र सरदार, मोटिवेशन स्पीकर मंटू कुमार, नरेन्द्र कुमार, योग प्रचारक निरंजन, आकाशवाणी के उद्घोषक राजेश कुमार, संजय शर्मा, अरुण अभिज्ञान, नवीन कुमार, विद्यालय, प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सुराई माँझी एवं पूर्व अध्यक्ष उज्ज्वल मंडल ने कहानी सुनायी। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरविंद तिवारी ने किया।

कहानी मेला के दौरान पतंजलि योग समिति की ओर से विद्यालय में ‘गिलोय’ पौधारोपण भी किया गया।

आज कहानी मेला की खासियत यह रही है कि बच्चों ने पास के दावनाटांड़ जंगल में वनभोज का भी आनंद लिया। वनभोज के दौरान ने भी कहानी सुनायी।

कहानी मेला व वनभोज को सफल बनाने में ग्राम प्रधान मंगल पान, पूर्व मुखिया राजाराम मुंडा, प्रणब भगत, लोहारसिंह मुंडा, लालचंद भकत, चंदना मंडल, सीतारानी मुर्मू, मैन सिंह सरदार, वार्ड मेम्बर, मोगला मांझी, बुधु मुंडा, मुखिया सुशीला मुंडा, दुलाल भकत, शिक्षक सनत मंडल एवं विश्वजीत सरदार ने सक्रिय भूमिका निभायी।

*बच्चों ने सुनी पंचतंत्र, प्रसिद्ध कथाकारों एवम स्थानीय भाषा की कहानियां*
बंगला साहित्यकार सुनील कुमार डे ने अपनी रचना से अंधविश्वास जैसे सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया। आकाशवाणी जमशेदपुर के उद् घोषक राजेश कुमार ने पंचतंत्र की कहानी “शेर और बैल की कहानी” के माध्यम से किसी पर आँख मूंद कर भरोसा नहीं करने का संदेश दिया।

युवा साहित्यकार एवम सामाजिक कार्यकर्ता तरुण कुमार ने अपनी रचना “नई शुरुआत” के माध्यम से असफलताओं से हिम्मत हारने के बजाए हमेशा प्रयास जारी रखने का संदेश दिया।

तरुण ने कथा सम्राट प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी “ईदगाह” का वाचन कर बच्चों को बताया कि हर एक बच्चे में एक हीरो छुपा हुआ है। ईदगाह कहानी के बाल नायक हामिद ने दादी अमीना के लिए मेले से चिमटा खरीदकर लाना बेहद भावनात्मक है, जिससे प्रेरणा ली जा सकती है।

केंद्रीय विद्यालय टाटानगर के शिक्षक संतोष शर्मा ने कछुए एवम खरगोश की आधुनिक कहानी सुनाते हुए अतिआत्मविश्वास से बचने की शिक्षा दी। मौके पर पत्रकार सत्येंद्र एवं संजय प्रसाद, पत्रकारिता के विद्यार्थी विधान रॉय, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य सुराई मांझी, रंगकर्मी विजय भूषण, अरुणा भूषण ने भी कहानियों के माध्यम से बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

*स्थानीय भाषा की कहानियों से बच्चे हुये रूबरू:*
कहानी मेला के दौरान साहित्य में स्थानीय भाषा के महत्त्व पर ध्यान देते हुए भूमिज भाषा में लिखी कहानियों का वाचन किया गया। साहित्यकार विभीषण सरदार एवम जितेन सरदार ने भूमिज भाषा में लिखी कहानियों को सुनाया।

*टांगराईन विद्यालय में बनाया जायेगा औषधीय बगीचा:*
औषधीय गुणों से भरपूर गिलोय का पौधा लगाकर विद्यालय परिसर में औषधीय बगीचा बनाने की आधारशिला रखी गयी। युवा भारत के जिला प्रभारी नरेंद्र कुमार, पतंजलि योग प्रचारक निरंजन कुमार एवम मोटिवेशनल स्पीकर मंटू कुमार ने गिलोय के औषधीय गुणों के बारे में विस्तार से बताया।

*बच्चों के साथ कहानी वाचकों ने लिया वनभोज का आनंद, ग्रामीणों ने किया वनभोज का आयोजन:*
कहानी मेला के दौरान ग्रामीणों ने वनभोज का आयोजन कर कथा वाचकों का विशेष स्वागत किया। कहानी मेला एवम वनभोज के आयोजन में ग्रामीण प्रणव भकत, लोहार सिंह मुंडा, लालचंद मुंडा, सितारानी भकत, चन्दन मंडल, सितारानी मुर्मू, मानसिंह सरदार, दुलाली भकत, मुखिया मंगल पान , सुशीला एवम अन्य ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मौके पर उज्जवल , समाजसेवी संजय शर्मा, अरुण अभिज्ञान, नवीन एवम अन्य भी उपस्थित थे। कहानी मेला के दूसरे दिन 160 से ज्यादा बच्चों ने शिरकत की।

 

 

 

 
 
 
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