पहला पन्ना / खबरें / गतिविधियाँ / कथा जगत के कई सूरज, कई सितारे स्वयं टांगराईन आकर सुनाएँगे बच्चों को कहानी

 

कहानी मेला में होगा साहित्यकारों व रंगकर्मियों का जुटान

हिंदी जगत के प्रखर साहित्यकार व शिक्षक डॉ. सी भास्कर राव
हिंदी जगत के प्रखर व स्थापित साहित्यकार और शिक्षक डॉ. सी भास्कर राव

टांगराईन, पोटका (जमशेदपुर): कहानी पढ़ने, सुनने व समझने की क्षमता के विकास के लिए किसी भी सरकारी विद्यालय में पहली बार ‘कहानी मेला’ का आयोजन हो रहा है। यह अनूठा आयोजन पोटका प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, टांगराईन में 6, 7 एवं 8 जनवरी, 2018 को होगा। इसमें बड़ी संख्या में साहित्यकारों व रंगकर्मियों का जुटान होने जा रहा है।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरविंद तिवारी ने बताया कि मेले में आमंत्रित अतिथि बच्चों को अपनी मनपसंद कहानी सुनाएँगे और उनके साथ विभिन्न प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों में भाग भी लेंगे।

युवा ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित व देश के शीर्षस्थ कथाकारों में शुमार किये जानेवाले जयनंदन

छह जनवरी, 2018 को प्रातः 11.30 बजे कहानी मेला का विधिवत उद्घाटन होगा। शहर के वरिष्ठ साहित्यकार श्री सी भास्कर राव, युवा ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता कथाकार जयनंदन, साहित्य समीक्षक विजय शर्मा, संथाली साहित्यकार दिगंबर हांसदा, रंगकर्मी अवतार सिंह, संजय भारती व रविकांत मिश्रा तथा पत्रकार संजय प्रसाद व अखिलेश्वर पांडेय ने इस कहानी मेला में भाग लेने हेतु अपनी सहमति औपचारिक रूप से दे दी है।

दूसरे दिन सुनील कुमार डे, दुलाल दास, पत्रकार सत्येन्द्र, रंगकर्मी विजय भूषण, अरुणा भूषण, युवा साहित्यकार तरुण कुमार, राजेश कुमार, मनीष कुमार, संतोष शर्मा, विधान राय व अनमोल एवं साहित्यकार आशुतोष झा भाग लेंगे।

कहानी मेला के तीसरे एवं अंतिम दिन रंगकर्मी मो. निजाम, शिवलाल सागर, गौतम गोप व युवा साहित्यकार अपर्णा वाजपेयी, विजय सिंह सहित कई लोग कहानी कहने-सुनने के इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।

हिंदी जगत की मशहूर समीक्षक, कथाकार एवं अनुवादक प्रो. विजय शर्मा।

अरविंद तिवारी ने बताया कि अभी भी कहानी मेला में लोगों को शामिल करने के लिए संपर्क किया जा रहा है।

कहानी मेला को सफल बनाने के लिए पूरा विद्यालय परिवार पूरे मनोयोग से जुटा हुआ है। इस कहानी मेला में सुनायी जानेवाली कहानियों को संकलित किया जाएगा और कथावाचन का वीडियो भी तैयार किया जाएगा और उन्हें प्रकाशित किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को प्रवीण साहित्यकारों, रंगकर्मियों व पत्रकारों द्वारा कही गयी कहानियों से सीखने का मौका मिले।

 

 

 

 
 
 
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