पहला पन्ना / खबरें / गतिविधियाँ / टांगराईन स्कूल के बच्चों को मिला अमेरिका के सुब्रतो मुखर्जी का स्नेहभरा हाथ, बच्चों के लिए भेजीं ढेर सारी किताबें-कॉमिक्स

 

टांगराईन, पोटका (जमशेदपुर), १९ दिसंबर, २०१७: भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक एवं जेरॉक्स कंपनी के पूर्व मैनेजर सुब्रतो मुखर्जी ने उत्क्रमित मध्य विद्यालय, टांगराईन के बच्चों के शिक्षा के प्रति उत्साह से प्रभावित होकर उनके लिए ढेर सारी किताबें एवं कॉमिक्स भेजी हैं।

सुब्रतो मुखर्जी
सुब्रतो मुखर्जी

उन्होंने बच्चों के शैक्षणिक विकास के लिए हर संभव सहयोग का वायदा किया है तथा टांगराईन विद्यालय के अवसंरचात्मक विकास में गहरी दिलचस्पी दिखायी है।

७२ वर्षीय श्री मुखर्जी फिलहाल अमेरिका के स्कॉमबर्ग में रहते हैं। उनका जन्म जमशेदपुर के टाटा मुख्य अस्पताल में ही हुआ था। उनका बचपन बिस्टुपुर, जमशेदपुर में बीता है। उनके पिता श्री बिनय गोपाल मुखर्जी जमशेदपुर के एक जाने-माने शिक्षक थे और मास्टर मोशाय के नाम से जाने जाते थे। बाद में, उन्होंने टाटा स्टील में एजुकेशन ऑफिसर के पद पर भी काम किया था।

उन्होंने कई वर्षों तक केएमपीएम एवं आर डी टाटा हाई स्कूल में शिक्षक के रूप में भी काम किया था और बाद में जमशेदपुर मिडिल स्कूल, बिस्टुपुर के हेडमास्टर बने। वही स्कूल कालांतर में जमशेदपुर वीमेंस कॉलेज में परिवर्तित हो गया। ६० के दशक में उनका परिवार भारत छोड़कर अमेरिका चला गया और अब वे अमेरिकी नागरिक बन चुके हैं।

श्री सुब्रतो मुखर्जी को जमशेदपुर एवं आसपास के क्षेत्रों से गहरा लगाव है और वे यहाँ के लोगों के जनजीवन एवं यहाँ की खबरों में गहरी रुचि रखते हैं। यही वजह है कि अखबारों-खबरों में टांगराईन स्कूल के बच्चों के शैक्षणिक प्रयासों के बारे में जानकर वे काफी प्रभावित हुए और उन्होंने इस स्कूल के बच्चों की शैक्षणिक गतिविधियों में सहयोग करने का निर्णय लिया।

अपने सामाजिक दायित्व के प्रति जागरुक श्री मुखर्जी इससे पूर्व भी सामाजिक एवं सामुदायिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। वे बेंगाली एसोसिएशन ऑफ ग्रेटर शिकागो के संस्थापक सदस्य भी हैं तथा कई वर्षों तक इसके प्रेसिडेंट रहे। साथ ही, वे वर्तमान में, भारत सेवाश्रम संघ, शिकागो के चेयरपर्सन भी हैं।

श्री मुखर्जी का कहना है, “सभी जानते हैं कि एक बच्चे के पालन-पोषण और विकास में पूरे गाँव का योगदान होता है। पर हम यह भूल जाते हैं कि एक अच्छे स्कूल के लिए भी अभिभावकों, गाँवों, समुदायों एवं सारे नागरिकों की सक्रियता जरूरी होती है। एक स्कूल केवल स्कूल प्रबंधन या सरकार की जिम्मेवारी नहीं होता। शिक्षक अकेले ज्यादा कुछ नहीं कर सकते, उन्हें समुदाय का सहयोग चाहिए। खासकर, भारत जैसे देश में जहाँ अवसंरचना एवं संसाधनों की कमी है, समुदाय के सक्षम लोगों को स्कूल के शैक्षणिक एवं अवसंरचनात्मक विकास में सक्रिय योगदान करना चाहिए।”

टांगराईन ग्राम की श्रीमती धानी माँझी एवं सुशांत मंडल द्वारा स्कूल के विकास हेतु जमीन दान में दिये जाने के फैसले से श्री मुखर्जी काफी प्रभावित हुए हैं। उनकी प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा, “इन ग्रामीणों की यह सामाजिक पहल भविष्य में एक बड़े वृक्ष का रूप लेगी और इस इलाके के हजारों विद्यार्थियों के जीवन को प्रकाशमान करेगी।”

विद्यालय के शिक्षकों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “टांगराईन स्कूल के शिक्षकों द्वारा दर्शाये जा रहे लीडरशिप एवं विश्व के सबसे अग्रणी देशों में शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय शीर्षस्थ शिक्षाविदों द्वारा किये जा रहे लीडरशिप में कोई ज्यादा अंतर नहीं, सिवाय अवसंरचना एवं सामुदायिक भागीदारी के स्तर के। ऐसे शिक्षकों एवं विद्यालयों को समुदाय के सबल लोगों का सहयोग चाहिए ताकि वे अपने दायरे में रहते हुए भी हजारों-लाखों बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बना सकें। दुनिया के दूसरे कोने में रहते हुए भी मैंने टांगराईन स्कूल के बच्चों को उनके शैक्षणिक प्रयासों में हर संभव सहयोग देने का निर्णय लिया है। मुझे विश्वास है कि समुदाय के अन्य सबल लोग भी अपने-अपने इलाके के स्कूलों के विकास में सक्रिय योगदान करना जारी रखेंगे।”

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