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  • टांगऱाईन म0वि0 की नई पहल
  •  लेखन केे प्रति बच्चों में रूचि जगाने हेतु होगा लेखन कार्यशालाओं का आयोजन
  • कहानियों के साथ-साथ बच्चों को तकनीक के सकारात्मक उपयोग सिखलाने पर होगा जोर

9 अप्रैल 2018, पोटका / जमशेदपुर : उत्क्रमित म0वि0, टांगराईन में आज सृजनात्मक लेखन पर कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें रिसोर्स पर्सन के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता तरुण कुमार, विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरविन्द तिवारी तथा म0वि0 चाकड़ी के शिक्षक मुकेश कुमार उपस्थित थे। कार्यशाला में 30 बच्चों ने भाग लिया।

कहानियाँ सीखने-सिखाने का एक संपूर्ण माध्यम है। बच्चों में कहानियों के प्रति रूचि बढ़ाने के उद्देश्य से जनवरी 2018 में पोटका स्थित म0वि0 टांगराईन में आयोजित कहानी मेला बेहद चर्चित रहा था। जिसमें नामचीन साहित्यकारों सहित युवा रचनाकारों ने शिरकत कर बच्चों को तरह-तरह की कहानियां सुनाई थी। इसी तर्ज़ पर विद्यालय ने बच्चों में लेखन के प्रति रूचि बढ़ानेे हेतु लगातार लेखन कार्यशालायें आयोजित करने की योजना बनाई है।

जीवन के हर छोटे-बड़े, अच्छे-बुरे अनुभव देते है लिखने की प्रेरणा : तरुण कुमार
बच्चों के बीच लोकप्रिय पंचतंत्र की कहानियों पर आधारित सत्र के माध्यम से विद्यालय में लेखन कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। मौके पर युवा साहित्यकार व सामाजिक कार्यकर्त्ता तरुण कुमार ने पंचतंत्र की कहानियों के माध्यम से बच्चों को दैनिक जीवन के छोटे-छोटे रोचक घटनाक्रमों और अच्छे सामाजिक मूल्यों वाले संदेश की तरफ उनका ध्यान आकर्षित किया, बताया कि हमारे जीवन के हर छोटे-बड़े, अच्छे-बुरे अनुभव हमें लिखने की प्रेरणा दे सकते है।

आप अपने अनुभवों को अपनी सोच को कागज पर उतारने का प्रयास करें, आप सभी लिख सकते है। इस क्रम में बच्चों ने ग्राम्य जीवन व जानवरों के साथ मानव के भावनात्मक संबंधों के आधार पर रचनाओं को गढ़ने का प्रयास भी किया। इस क्रम में म0वि0 चाकड़ी के शिक्षक मुकेश कुमार ने बच्चों को किताबें, पत्र-पत्रिकाओं को पढ़ने की आदत डालने और अपना शब्दकोष समृद्ध करने को प्रेरित किया।

पंचतंत्र की कहानियों से प्रेरित होगा विद्यालय अख़बार “दिया” का आगामी अंक :
म0वि0 टांगराइन के बच्चों के द्वारा दीवार अख़बार ‘दिया’ का प्रकाशन किया जाता है। अख़बार का आगामी अंक पंचतंत्र की कहानियों से प्रेरित होगा। पंचतंत्र की कहानियों की तर्ज पर बच्चे अपने ग्राम्य जीवन और जानवरों के साथ के अनुभव के आधार पर कहानियां गढ़ने का प्रयास करेंगे। जिनमें चयनित रचनाओं को स्थान दिया जायेगा।

कहानियों के माध्यम से बच्चों को तकनीक का सकारात्मक उपयोग सिखलाने पर भी होगा विशेष जोर :
दिया के आगामी अंक विद्यालय की वेबसाइट सहित ईपेपर संस्करण में भी उपलब्ध करवाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। दिया के डिजिटल संस्करण हेतु सामग्रियां स्मार्टफोन के माध्यम से बच्चे खुद तैयार कर सके। इसके लिए भी लेखन कार्यशालाओं की श्रृंखला के दौरान बच्चों को विशेष प्रशिक्षण दिया जायेगा। उपरोक्त पहल में विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक अरविन्द तिवारी एवम युवा साहित्यकार व सामाजिक कार्यकर्ता तरुण कुमार महत्वपूर्ण भूमिका में होंगे।

 

 
 
 
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