पहला पन्ना / नास्ति विद्यासमो बन्धुर्नास्ति विद्यासमः सुहृत । नास्ति विद्यासमं वित्तं नास्ति विद्यासमं सुखम् ।।

 

विद्या जैसा बंधु नहीं, विद्या जैसा मित्र नहीं, और विद्या जैसा अन्य कोई धन या सुख नहीं।

 
 
 
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